Thursday, June 30, 2022

मैं पलभर दुखी नहीं होता !!

आज मम्मी का जन्मदिन है! हालांकि वो हमारे साथ नहीं हैं और 03-07-2016 को वो यह नश्वर शरीर छोड़कर परमधाम को चली गईं थीं पर मैं दुखी नहीं हूँ बल्कि खुश हूँ क्योंकि वो हमेशा मुझे खुश देखना चाहती थीं। आज उनके जन्मदिन के दिन मैं यह कविता उन्हें समर्पित करता हूँ !!

जन्मदिन मुबारक हो मम्मी !!

मैं पल भर दुखी नहीं होता!!
क्यों रोकर तुमको याद करूँ, तुमने तो सदा हँसाया था,
जीवन जीने का सही तौर, तुमने ही तो सिखलाया था।
कैसी भी विपदा आन पड़े, तुम सदा दिलासा देती थीं,
खुशियाँ हम सबके हिस्से में, दुख सारे खुद रख लेती थीं।
जब जीते जी मुझको रोता तुम देख नहीं सकती थीं माँ,
ईश्वर के घर से फिर मुझको कैसे देखोगी तुम रोता!!
मैं पलभर दुखी नहीं होता !!

तुम पास नहीं हो मेरे यह पलभर मुझको एहसास नहीं,
तुम तो मेरी जीवन शैली, तुम बिन मेरी एक श्वास नहीं।
मैं कैसे याद करूं तुमको जब, एक पल भूल नहीं पाता,
मेरी वाणी, मेरी स्मृति, मेरा लेखन तुमसे आता।
वो मुस्काता चेहरा हरदम मेरी आँखों में रहता है,
बस इसीलिए इन आँखों को, आँसू से कभी नहीं धोता!
मैं पलभर दुखी नहीं होता !!
::
अम्बेश तिवारी 
30-06-2022


Thursday, May 19, 2022

संस्मरण : इंटरव्यू भाग-2

संस्मरण : इंटरव्यू  भाग-2
जिन्होंने पिछला भाग नहीं पढ़ा वो कमेंट में दिए लिंक पर जाकर पढ़ लें जिससे आगे की कहानी समझ में आ जाये।

गतांक से आगे-
भण्डारी साहब की बात सुनकर मैं आश्चर्य से उनकी ओर देखता रह गया !! फिर उनको Thank You Sir बोलकर मैं उनके केबिन से निकला और याशिका मैडम के पास पहुंचा !!

"मैम वो भण्डारी सर ने आपसे मिलने के लिए..."
मेरा वाक्य पूरा होता इससे पहले ही उसने इशारे से मुझे बैठने के लिए बोला !! 
मैं बैठ गया ! उसने चपरासी को बुलाया और मेरी ओर देखकर बोली आप चाय लेंगे या कोल्डड्रिंक ?
Anything Mam !! मैंने जवाब दिया !
उसने चपरासी से दो चाय लाने को कहा फिर मुझे सामने बने एक छोटे से कॉन्फ्रेंस रूम में बुलाया और पूछा "आप पहले कभी बॉम्बे गए हैं ?"
मैंने न में सिर हिलाया तो वो बोली 
"ओके! अब मेरी बात ध्यान से सुनिए ! हमारा ऑफिस Lower Parel में बांद्रा-कुर्ला रोड पर है ! तो आपको लोकल से अंधेरी स्टेशन उतर कर West side जाना होगा! वहाँ से ऑटो या बस पकड़ कर जाना होगा !! मुम्बई में आपको लोकल ट्रेन से ही सफर करना होगा जो बेहद crowded होती है ! इसलिए luggage कम से कम ले जाना और जिस स्टेशन में उतरना हो उससे एक स्टेशन आगे का टिकट लेना ! जाते ही सबसे पहले Mumbai Local Train Guide खरीद लेना, उसमें रुट मैप बना रहता है तो जहाँ उतरना हो उससे एक स्टेशन पहले लोकल के गेट पर आ जाना !! लोकल केवल 30 सेकंड रूकती है उसी में चढ़ने वाले चढ़ते हैं और उतरने वाले उतर जाते हैं ! So be attentive !! यहाँ की तरह सो मत जाना। एक बात का खास ख्याल रखना कि हर लोकल में दो डिब्बे सिर्फ महिलाओं के लिए और दो डिब्बे फर्स्टक्लास के होते हैं। वो डिब्बे, बाकी डिब्बों से कुछ खाली दिखेंगे पर गलती से भी महिला डिब्बे या फर्स्टक्लास में मत बैठ जाना वरना बाद में बहुत पछताओगे! दूसरी बात Western Line में बांद्रा और Central Line में Sion से आगे साउथ बॉम्बे में ऑटो नहीं चलता है तो वहाँ लोकल या बस से ही सफर करना! गलती से भी टैक्सी मत करना! वरना जितने पैसे ले जा रहे हो वो एक बार में ही उड़ जाएंगे !! मैं किसी मन्त्रमुग्ध भक्त की तरह उसके प्रवचन बड़े ध्यान से सुन रहा था! फिर उसने एक पेपर पर कम्पनी का पूरा पता, फ़ोन नंबर, और वहाँ जाकर किससे मिलना है यह सारी detail लिखकर दे दी! 
वो मंगलवार दिन था और मुझे शनिवार को सुबह 10 बजे मुम्बई में इंटरव्यू देना था !! इतनी जल्दी रिज़र्वेशन मिलने का सवाल ही नही था तो मैंने उससे पूछा "मैडम ! यह जून का महीना है और इतनी जल्दी ट्रेन में सीट तो मिलेगी नहीं तो मैं जाऊंगा कैसे ?
उसने मुस्कराते हुए जवाब दिया "That's not our problem !! You have to manage anyhow !! अगर टी.टी. को अलग से कोई पैसा देना पड़े तो वो भी मिल जायेगा But you have to reach there at given time, otherwise you'll loose the opportunity !! 
मैंने अपनी चाय खत्म की, उसे thanks कहा और वहाँ से निकल पड़ा ! शाम 5 बजे घर पहुंचा! मम्मी-पापा को पूरी बात बताई ! और कहा कि किसी भी तरह से शुक्रवार की शाम तक मुम्बई पहुँचना है !! 
पापा ने पूछा "मुम्बई में रुकोगे कहाँ?" और "जाओगे कैसे?"
मुझे दोनों जवाब नहीं मालूम थे !
मैंने कहा "कुछ जुगाड़ करते हैं !!" 
अब कानपुर के लौंडे को और कुछ आता हो या न आता हो पर जुगाड़ टेक्नोलॉजी आती है !! 
मुझे याद आया कि कानपुर सेंट्रल के बाहर शकील पानवाले को मुम्बई के टिकट दिलाने में महारत हासिल है ! मैं सीधा शक़ील के पास पहुँचा ! उससे बात की तो वो बोला "हो जाएगा जुगाड़ पर 700 रू लगेंगे।" उन दिनों मुम्बई का टिकट 300 रू के आसपास था और वो दुगुने से ज्यादा माँग रहा था !! मैं उससे पैसे कम करवाने की मशक्कत में लगा ही था कि सामने से मुझे रमेश अंकल आते दिखे !! रमेश अंकल (पापा के दोस्त) रेलवे में TTE थे ! मैं दौड़कर उनके पास पहुँचा और पैर छुए !! 
"यहाँ कैसे?" उन्होंने पूछा! 
मैंने उन्हें पूरी बात बताई तो वो बोले "कहाँ इस fraud शक़ील के चक्कर मे पड़ गए ! यह किसी दूसरे के नाम से टिकट देगा और अगर कहीं रास्ते में बैच पड़ गया तो लेने के देने पड़ जाएंगे!" 
मैंने कहा "फिर क्या करूँ अंकल मुम्बई तो जाना ही है !" वो बोले "तुम कल 4 बजे तक आगरा फोर्ट स्टेशन में आकर मुझसे मिलो ! मैं वहाँ से तुम्हें मुम्बई भिजवा दूँगा! हर हालत में परसों रात तक मुम्बई पहुँच जाओगे!" मैं निश्चिंत हो गया ! वहाँ से वापस घर आकर मुम्बई जाने की तैयारी में जुट गया ! मम्मी अभी भी चिन्तित थीं कि पहली बार इतने बड़े शहर में अकेले जा रहा हूँ और वहाँ रुकने का कोई ठिकाना भी नहीं ! अब मुम्बई में हमारे कानपुर जैसे धर्मशाला तो होते नहीं थे !! बड़े होटल में रुकने का खर्च हम जैसे लोगों के लिए और भी मुश्किल था ! खैर मैंने उन्हें समझाया कि मैं किसी सस्ते होटल या लॉज में जुगाड़ कर लूँगा !! 

तो दूसरे दिन, मैं एक बिना ट्राली वाला सफारी का पुराना सूटकेस लेकर निकल पड़ा !! स्टेशन पहुँच कर आगरा का जनरल टिकट लिया और सामने खड़ी कालका मेल के स्लीपर कोच में घुस गया !! लगभग पौने चार बजे आगरा पहुँचा ! वहाँ TTE रेस्टरूम में रमेश अंकल से मिला ! उन्होंने आगरा से बांद्रा टर्मिनस की एक वेटिंग टिकट हाथ में देते हुए कहा , 
"सुनो बेटा! यहाँ से सवा छह बजे एक आगरा-कोटा एक्सप्रेस जाती है जो सबेरे 9 बजे कोटा पहुँचेगी ! इस गाड़ी के दो डिब्बे देहरादून से आने वाली देहरादून-बांद्रा एक्सप्रेस में जुड़ते हैं ! अभी इस गाड़ी में मैं बर्थ दिलवा दूँगा और कोटा में जो भी TTE हो उससे मेरा नाम बता देना तो कोटा से बांद्रा तक वो बर्थ दे देगा !!" 
ठीक है अंकल thank you so much !! 
चलो चाय पीकर आते हैं !! अंकल जी बोले !!
फिर वहाँ चाय नाश्ता करके हम ट्रेन का इंतज़ार करने लगे !! छह बजे वो मुझे लेकर 4 नम्बर प्लेटफ़ॉर्म पर गए उस ट्रेन के TTE से मेरा परिचय करवाकर बोले "मेरा भतीजा है! इसे बॉम्बे जाना है आप देख लेना जरा" 
मुझे बर्थ दिलवाकर अंकल जी चले गए !! मैं भी अपनी साइड अपर बर्थ में जाकर बैठ गया !!  सुबह करीब सवा सात बजे मैं कोटा पहुँचा !! वो दो डिब्बे जिन्हें उस ट्रेन में जुड़कर मुम्बई जाना था, उन्हें अलग करके बाकी ट्रेन वापस आगरा के लिए चली गई !! मैंने अपना सामान उन्हीं में से एक डिब्बे में एक बर्थ के नीचे बाँध दिया और नीचे उतरकर देहरादून एक्सप्रेस का इंतज़ार करने लगा !! आधे घण्टे बाद ट्रेन आयी !! मैं लपककर TTE के पास पहुँचा और बड़ी रंगबाजी से रमेश अंकल का परिचय देते हुए उससे बर्थ माँगी !!
"बर्थ नहीं है!"
उसने टका से जवाब दिया !!
मैंने फिर जोर देकर रमेश अरोड़ा जी का नाम बताया तो वो गुस्से से बोला 
"अरे जब बर्थ है नहीं तो क्या पैदा कर दें !"
जाओ जहाँ मन हो बैठ जाओ जाके ! अगर कोई बर्थ खाली हुई तो देखते हैं !!
मैं परेशान था क्योंकि अभी पूरे 20 घण्टे से ज्यादा का सफर बाकी था और इस गर्मी में बिना सीट के सफर काटना बेहद मुश्किल हो जाता !! खैर मरता क्या न करता ! जहाँ सामान बाँधा था वहीं जाकर खड़ा हो गया !! ट्रेन में वाकई जगह नहीं थी क्योंकि हर डिब्बे की 72 सीटों पर 100 से 120 लोग तो पहले से ही बैठे थे ! मैं मन ही मन रमेश अंकल को कोस रहा था कि कहाँ फँसा दिया यार !! खैर ट्रेन चली और मैं डिब्बे के बाथरूम के पास ज़मीन पर अखबार बिछा कर बैठ गया !! यूँ ही बैठे बैठे एक एक स्टेशन गुज़रता जा रहा था ! जब ट्रेन रुकती तो मैं उतर कर प्लेटफार्म पर थोड़ा टहल लेता और जब चलती तो फिर वहीं गेट के पास अखबार बिछा कर बैठ जाता !! राजस्थान के स्टेशनों में एक खास बात देखने मिली कि हर स्टेशन पर मारवाड़ी समाज के लोग मुफ्त जलसेवा दे रहे थे !! जैसे ही ट्रेन रुकती लोग दौड़कर डिब्बे के पास आकर खिड़कियों से आपकी बोतलें आदि ठन्डे पानी से भर देते थे !! उन दिनों स्टेशनों में ठण्डे पानी की मशीनों का सिस्टम नहीं शुरु हुआ था !!
खैर यह सब देखते देखते रतलाम स्टेशन आ गया ! इस समय दोपहर का ढाई बजा होगा !! यहाँ गाड़ी आधे घण्टे के लिए रुकी !! मैंने यहीं खाना खाया और फिर TTE के पास जाकर उनसे बर्थ के लिए अनुरोध किया !! पता नहीं क्यों पर उसे मेरी हालात पर तरस आ गया ! वो बोला जाओ S-9 की सात नम्बर बर्थ ले लो !! यह साइड लोअर बर्थ थी एकदम गेट से लगी हुई !! मैं दौड़कर अपना सामान ले आया और उस बर्थ पर कब्जा कर लिया !! और फिर राजस्थान और गुजरात के अलग अलग शहरों से होते हुए अगले दिन यानी शुक्रवार सुबह चार बजे मैं मुम्बई के बांद्रा टर्मिनस तक पहुँच गया !!
मैंने सोचा कि उजाला होने तक यहीं इंतज़ार करता हूँ फिर कुछ होटल आदि का इंतज़ाम करूँगा !! बाहर आकर पहले चाय पिया फिर उसी चायवाले से होटल के बारे में पूछा !! उसने बताया कि यहाँ ढेर सारे होटल हैं !! मैं तीन चार होटलों में गया पर सारे होटल महँगे थे !! कोई भी 1500 से नीचे नहीं था !! और मेरे पास कुल 2000 रू थे जिसमें से 250 रू खर्च हो चुके थे !! तो मुझे तीन चार सौ वाला होटल चाहिए था !! मैं वापस फिर उसी चायवाले के पास पहुँचा तो उसने कहा आप खार ईस्ट या सांताक्रुज ईस्ट चले जाइये वहाँ कुछ सस्ते लॉज मिल सकते हैं !! 
मैं लोकल ट्रेन से सांताक्रुज ईस्ट पहुंचा ! वहाँ पर एक ऑटो वाले से मैंने किसी सस्ते लॉज के बारे में पूछा ! मेरे लहज़े से वो समझ गया कि मैं भी भैया हूँ !! बोला कहाँ के हैं आप ? मैंने कहा कानपुर के !! 
वो बोला "अरे हम लालगंज रायबरेली से हैं !! आप तो मेरे ही इलाके हैं चलिए आपका कुछ तो इंतज़ाम करवाना ही पड़ेगा !!" वो मुझे थोड़ी दूरी पर एक सस्ते से लॉज में ले गया जिसका नाम अनिल गेस्ट हाउस था !! उसमें एक बड़े से हॉल में अलुमिनियम पार्टीशन करके 8×6 के छोटे छोटे केबिन बनाये गए थे !! जिसका किराया 300 रू रोज़ था !! मैंने एक केबिन ले लिया ! उसमें एक 6 बाय 3 का bed और बगल में एक चौकी पड़ी थी जिसमें एक जग में पानी और एक ग्लास था ! केबिन में बाहर से ताला लगा सकते थे पर ऊपर से सब एक ही था तो कोई सुरक्षा नहीं थी ! मैंने भी सोचा कि जब भी बाहर जाऊँगा तो रुपये और documents अपने साथ ही ले जाऊँगा !! रह गए कपड़े तो वो कोई क्यों चुराने लगा !! 
अब मेरे पास शुक्रवार का पूरा दिन था क्योंकि इंटरव्यू तो कल सुबह था इसलिए मैंने तय किया कि आज सबसे पहले जाकर कम्पनी का ऑफिस पता करूँगा जिससे कल इंटरव्यू के लिये समय से पहुँच सकूँ, फिर थोड़ा मुम्बई दर्शन किया जाएगा !! 
तो सुबह 10 बजे जीवन में पहली बार मुम्बई का वड़ापाव नाश्ते में खाकर मैं निकल पड़ा! पहले मुम्बई लोकल ट्रेन गाइड खरीदी फिर लोकल में बैठा। सांताक्रुज से अंधेरी केवल दो स्टेशन आगे है, पर मैंने टिकट जोगेश्वरी तक का लिया। पहली बार मुम्बई लोकल का सफर उसके peak hours में किया ! बाप रे ! कैसे रहते हैं लोग यहाँ !! इतनी भीड़ तो हमारे यहाँ केवल कार्तिक पूर्णिमा के मेले में या परेड की रामलीला में होती है।
थोड़ी देर बाद मैं Blue Cross Limited के ऑफिस के बाहर खड़ा था। बड़ी सी बिल्डिंग थी। उसके ठीक बगल में Himalaya कम्पनी का ऑफिस था। मुझे अपने होटल से यहाँ आने में लगभग 45 मिनट लगे। ऑफिस तो देख लिया अब क्या किया जाए ? मैंने खुद से सवाल किया और निकल पड़ा मुम्बई दर्शन को! सबसे पहले दादर स्टेशन पहुँचा जहाँ से shared taxi में बैठकर केवल 5रू में सिद्धिविनायक मन्दिर पहुँचा! गणपति दर्शन के बाद महालक्ष्मी मन्दिर और फिर गेटवे ऑफ इण्डिया ! शाम को जुहू में पहले अमिताभ बच्चन का बंगला प्रतीक्षा देखने गया। पर लोगों ने बताया कि अब वो यहाँ नहीं रहते। पास ही उनका दूसरा बंगला जलसा है उसमें रहते हैं। उनकी माताजी अभी भी इसी बंगले में रहती हैं। फिर मैं शाम को जुहू चौपाटी गया। वहाँ की भेल और पानीपुरी खाई। पूरे दिन खूब मस्ती करके देर रात लॉज पर पहुँचा। 

अगले दिन शनिवार को सुबह जल्दी तैयार होकर मैं कंपनी के ऑफिस 09:30 तक पहुँच गया! मुझे वहाँ Mr.N.Sateesh (National Sales Head) से मिलना था! Reception पर अपना परिचय देते हुए मैंने पूरी बात बताई! उन्होंने मुझे Mr.Rajesh Puri के पास भेजा जो शायद H.R.  Department से थे !  
पुरी साहब मुझे सतीश जी केबिन के बाहर तक ले गए और बोले अभी सर आये नहीं है! जब आएंगे तब आपको मिलवा देंगे। आप यहाँ इंतज़ार करिए। मैं बाहर पड़े सोफे पर बैठकर सतीश जी इंतज़ार करने लगा! 
लगभग पौने ग्यारह बजे एक छोटे से कद का घुंघराले बाल और मोटा से चश्मा लगाए एक व्यक्ति आया और मेरी ओर देखे बिना ही केबिन में   चला गया। शायद यही सतीश जी थे। मेरी धड़कने तेज हो रही थीं! यह पहला मौका था जब मैं किसी कम्पनी के National Head से मिलने जा रहा था। अब इंतज़ार मुश्किल हो रहा था।  लगभग साढ़े ग्यारह बजे, पुरी साहब हाथ में मेरी file लिए हुए उनके केबिन में दाखिल हुए! 5 मिनट बाद एक व्यक्ति आया और बोला जाइये आपको बुला रहे हैं। 
Sir May I Come in?
Yes please! Have a seat!
इंटरव्यू शुरू हुआ -

Q:- So tell me some thing about yourself?

Sir I am Ambesh Tiwari........के बाद पूरा एक traditional introduction.

Q:- This is first time you came to Bombay?

Yes Sir!!

Q:- When did you reached here?

Sir, Yesterday Morning!

Q:- So, what you did yesterday whole day?

Sir, I visited various places like Siddhi Vinayak, Gateway, Juhu Chaupati etc.

Q:-Very good! so you enjoyed a lot?

Yes Sir!

Q:- What are major products of your company?

Sir, It's Slimmerz(Weight reducing Capsule), Esulide-100DT(Nimesulide) Onkar-20 (Omeprazole) etc. 

Q:- Tell me about the indications and mode of action of Omeprazole.

Sir it is used for hyperacidity. 

Q:- and mode of action ??

Sorry Sir !!

Q:- OK, Mr.Tiwari please tell me the three major products of our company Blue Cross !!

Sorry Sir ! I don't know. 

Q:- Mr.Tiwari, you had plenty of time to spend ! Don't you think that you should gain the knowledge of the products of that company in which you are planning to work?

......................लम्बी खामोशी !! Sorry Sir !!

OK Mr.Tiwari, wait outside !!

मैं केबिन से बाहर निकल आया !! मैं समझ चुका था कि परिणाम क्या आने वाला है। दस मिनट बाद पुरी साहब बाहर आये और बोले आइए मेरे साथ !!
मुझे वो अपनी सीट पर ले गए और बोले "सॉरी ! तिवारी जी आपका selection नहीं हुआ है! आप अपना travelling expense इस फॉर्म में भर कर ले सकते हैं यह कहकर उन्होंने एक form मुझे दे दिया ! 
मैं आँखों में आँसू लिए वो फॉर्म हाथ में लेकर बाहर रिसेप्शन पर आ गया! किसी तरह काँपते हाथों से मैंने वो फॉर्म भर कर रिसेप्शन में जमा कर दिया। थोड़ी देर बाद पुरी साहब ने खर्चे के रुपये दिए और हाथ मिलाते हुए बोले "Better Luck next time!"
23 साल के जीवन में यह मेरा पहला Failure या Rejection था! जो आत्मविश्वास कल तक चरम पर था, आज वो धराशायी हो चुका था!

पर दोस्तों ज़िंदगी की असली लड़ाई इसके बाद शुरू हुई थी ! 
इस असफलता से मैं कैसे उबरा और कुछ दिनों के बाद Blue Cross से भी बड़ी कम्पनी J.B.CHEMICALS LTD यानी "Unique" में मुझे कैसे नौकरी मिली इसकी कहानी अगले भाग में !!

Tuesday, February 1, 2022

प्रतियोगिता दर्पण - एक छोटी सी लव स्टोरी

 साल 1998 की है ! हम ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर में थे ! चूँकि मोहल्ले में हमारी इमेज एक पढ़ाकू लड़के की थी तो मन में बहुत सारे अरमान होते हुए भी साला इमेज के चक्कर में हम अपने ख्वाबों का गला घोंट कर गुड़ बॉय बने रहते थे!! 
हालाँकि सामने वाली गली में रहने वाली विनीता माथुर हमको बचपन से पसन्द थी पर बीस बिस्वा वाले कान्यकुब्ज ब्राह्मण परिवार में जन्मे हम यानी मोहित बाजपेई पुत्र श्री रामरतन बाजपेई यह बात अच्छी तरह से जानते थे कि भले इराक विश्वयुद्ध में अमेरिका को हरा दे या बांग्लादेश एकदिवसीय वर्ल्डकप जीत जाए पर पण्डित जी अपने लौंडे को कायस्थ की लड़की के साथ पेंच लड़ाते देख कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे !! इसलिए विनीता को मन ही मन बेहद चाहने के बावजूद हम कभी इज़हारे मोहब्बत करने की हिम्मत ही नहीं कर पा रहे थे। पर कमबख्त इस दिल का क्या करते जो उसके लिए पागल था!!
विनीता डीजी कॉलेज से बीए कर रही थी और हम डीएवी कॉलेज से बीएससी। दोनों का कॉलेज पासपास था तो हम कई बार हम उसे अपनी पुरानी चेतक स्कूटर पर लिफ्ट देने की पेशकश कर चुके थे। एकाध बार वो मान भी गयी पर हम Hi, Hello, how are you या ज्यादा से ज्यादा "पढ़ाई कैसी चल रही है" से आगे बढ़ ही नहीं पा रहे थे ! हमें बस एक मौके के तलाश थी और वो मौका हमें दिया "प्रतियोगिता दर्पण" ने !! 
तो किस्सा कुछ यूँ है कि उन दिनों हमारी उम्र के हर युवा के लिए बैंक, एसएससी आदि की तैयारी करना एक आवश्यक कर्म था और हम सब प्रतियोगिता दर्पण नामक मासिक पत्रिका पढ़ते थे! प्रतियोगिता दर्पण में हर माह एक निबन्ध प्रतियोगिता होती थी जिसके विजेताओं को क्रमशः 1001, 501 और 251 के प्रथम द्वितीय और तृतीय पुरस्कार दिए जाते थे। अगस्त 1998 की प्रतियोगिता दर्पण में निबंध का विषय था "नारी सशक्तिकरण में भारत की भूमिका"। चूँकि हमारी लेखन और भाषण कला पूरे मोहल्ले में जगप्रसिद्ध थी इसलिए एक दिन दोपहर में विनीता हाथ में किताबें लिए मेरे घर आयी। मम्मी से बोली आंटी मोहित है ? वो मुझे अपने कोर्स का कुछ पूछना है! मम्मी ने मुझे आवाज़ दी "मोहित देखो विनीता तुमसे कुछ पूछने आयी है!!"  मेरे तो बाँछे खिल गईं !! मेरे पहुंचने पर वो मैगज़ीन मुझे दिखाती हुए बोली "मोहित मेरे लिए यह निबन्ध लिख दो प्लीज !! मैं अपने नाम से भेजना चाहती हूँ" 
हमने छूटते ही सवाल किया "मान लो कि हमने निबन्ध लिखा और उस निबन्ध को इनाम मिला तो वो इनाम तो तुम रखोगी हमको क्या मिलेगा?"
उसने हँसते हुए जवाब दिया "पहले इनाम मिले तो,  फिर देखेंगे" 
इस संक्षिप्त मुलाकत के बाद हमने पूरी शिद्दत से उसके लिए निबन्ध लिखा और उसे दे दिया जिसे उसने अपने नाम से भेज दिया!! फिर मैं इस बात को भूल ही गया !!
पर दो महीने बाद एक दिन वो प्रतियोगिता दर्पण और मिठाई का डिब्बा हाथ में लिए मेरे घर आई और बोली "मोहित !! तुम्हारे लिखे निबंध को द्वितीय पुरस्कार मिला है!! यह देखो किताब में मेरा नाम छ्पा है! तुम्हारी वजह से!! Thank you so much" "मालूम है मम्मी तो सारे रिश्तेदारों को फ़ोन करके बता चुकी हैं !!" उसने खुशी से चहकते हुए कहा !!
हूँ अच्छा है !! पर इन सबसे मुझे क्या फायदा!! मैंने स्टाइल मारते हुए बेरुखी से जवाब दिया !!
"अरे फायदा क्यों नहीं होगा !! यह लो ! उसने मेरे हाथ में कुछ पैसे और मिठाई का डिब्बा रख दिया !! और बताया कि मेरे लिखे उस निबन्ध को 501 रू का पुरुस्कार मिला था। उस जमाने में मनी-ऑर्डर आता था और डाकिया कुछ पैसे काटकर पैसे देता था तो विनीता को कुल 475/- रू मिले थे! वो सोंटे वाले हनुमान जी के मन्दिर में ग्यारह रूपये का प्रसाद चढ़ा कर बाकी बचे 464 रुपयों में से आधे यानी 232/- रूपये और प्रसाद मुझे देने के लिए लायी थी!! 
मैंने प्रसाद तो खा लिया पर इम्प्रैशन जमाने के लिए रुपये उसे वापस देते हुए कहा "मुझे रुपये नहीं चाहिए! यह तुम्हीं रखो !!"
पर वो जिद पर अड़ गयी "देखो तुमने मेहनत से लिखा था तो आधे पैसे पर तो तुम्हारा ही हक़ है"
अब मैंने उसे अपनी हैंडराइटिंग में कॉपी किया फिर मैगजीन के ऑफिस में रजिस्टर्ड पोस्ट से भेजा तो आधे पैसे पर तो मेरा भी हक़ है न !! 
बस यही वो क्षण था जब मेरे दिमाग में खुराफात घूम गयी !! मैंने कहा कि मैं एक शर्त पर यह पैसे ले सकता हूँ, और वो यह कि, इन पैसों से हम दोनों एक फ़िल्म देखने चलें और फिर किसी अच्छे से रेस्तरां में बैठकर लंच करें !
उसने घूर कर मेरी तरफ देखा और बोली अच्छा बच्चू मेरे साथ डेट पर जाने का अच्छा बहाना ढूँढा है तुमने ! मैने हँसकर कहा "ऐसा ही समझ लो एक दिन के लिए तुम जस्ट फ्रेंड से मेरी गर्ल-फ्रेंड बन जाओ!"
वो हँसकर बोली ठीक है कल सोचकर बताऊँगी !! 
दूसरे दिन उसका लैंडलाइन पर फोन आया "मोहित मैं तैयार हूँ ! कब चलना है !" मैंने कहा कल कॉलेज के बाद दो बजे नवीन मार्किट में सिंह बुक स्टाल पर मिलो तब पूरा प्लान बताऊँगा!"
दूसरे दिन तय हुआ कि शनिवार को हम दोनों कॉलेज जल्दी छोड़ देंगे! 11:30 बजे मैं डीजी कॉलेज के सामने उसका इंतजार करूँगा!! वहाँ से हम दोनों हीर पैलेस में "कुछ कुछ होता है" देखेंगे और फिर क्वालिटी रेस्टोरेंट में खाना खाएंगे !! घर पर बोलकर आना है कि शाम 5 बजे तक लौटेंगे !!
तो तय समयानुसार हम दोनों मिले फिर उसे अपनी पुरानी स्कूटर पर बिठाकर हम फर्राटे से मालरोड की ओर निकल पड़े ! अभी फ़िल्म शुरू होने में समय था तो हम दोनों ने पहले बिरहाना रोड में शंकर के गोलगप्पे निपटाए क्योंकि उसको गोलगप्पे बहुत पसंद थे। 
"कुछ कुछ होता है" देखते हुए सिनेमाहॉल के भीतर क्या हुआ, इसे राज़ ही रहने देते हैं या यूँ कहें कि इसे आपकी कल्पना पर छोड़ देते हैं !! पर इतना जरूर था कि हॉल से निकलते वक्त हम दोनों यह बात जान चुके थे कि हम अब just friends तो नहीं थे।
इंटरवल में कोल्डड्रिंक और समोसा खाने के बाद पेट में ज्यादा जगह नहीं बची थी इसलिए हमने लंच के तौर पर पूरा खाना खाने के बजाय पहले क्वालिटी में डोसा और फिर रीटा में आइसक्रीम खाई! शायद ज़िन्दगी में पहली बार मैं किसी लडक़ी के साथ ऐसे घूम रहा था! पर यह सब करते हुए हमें कतई इस बात का भान नहीं रहा कोई हमें यह सब करते देख रहा था! 
जी हाँ !! जैसे हर लवस्टोरी में एक विलेन होता है वो यहाँ भी था !! माथुर अंकल के बगल में रहने वाले कपूर साहब का बेटा बन्टी जो बीएनडी कॉलेज के अपने दोस्तों के साथ फ़िल्म देखने आया था उसने हमारी पूरी गतिविधियों को नोट कर लिया था। पर चूँकि वो मोहल्ले में आवारागर्दी के लिए बदनाम था तो उसे मालूम था कि उसकी बातों पर कोई यकीन नहीं करेगा अतः उसने हमें बदनाम करवाने और हमारे किस्से को फसाना बनाकर हर घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी मोहल्ले में आटा-चक्की चलाने वाले केदार नाथ गुप्ता उर्फ कल्लू भईया को !! 
कल्लू भईया को आप चलता फिरता अखबार कह सकते हैं !! किसके घर में क्या चल रहा है, कौन कब  आ-जा रहा है, किसकी किससे लड़ाई चल रही है उनको सब पता होता था !! तो बन्टी ने कल्लू भईया को दो राजश्री की पुड़िया खिलाकर हमारी लवस्टोरी का प्रसारण पूरे मोहल्ले में करवा दिया !! 
बात माथुर अंकल के कान तक भी पहुँची ! उन्होंने पहले विनीता से पूछा ! थोड़ी टालमटोल के बाद विनीता ने पूरा किस्सा (सिनेमाहाल के अन्दर वाले हिस्से को छोड़कर) उनके सामने तोते की तरह उगल दिया ! माथुर अंकल मेरे पापा के उग्र स्वभाव से परिचित थे अतः उन्होंने मम्मी से बात की और अपनी तरफ से नमक-मिर्च लगा कर पेश किया पर मम्मी ने मेरी आशा के विपरीत प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें यह कह कर समझा-बुझा के भेज दिया कि "भाई साहब ! यह उमर ही ऐसी है ! बच्चों ने कोई गलत काम नहीं किया है और मुझे उन दोनों पर पूरा यकीन है! आप निश्चिंत रहिए और लोगों की बातों पर ध्यान मत दीजिये बाकी मैं मोहित से बात करूंगी!!"
मम्मी ने हमसे पूछा तो हमने वही कहानी दोहरा दी ! मम्मी ने समझाया कि "बेटा देखो हमको तो कोई फर्क नहीं पड़ता पर अगर कहीं पापा को पता लग गया तो तुम जानते ही हो ! इसलिए हो सके तो विनीता से थोड़ा दूर ही रहो !! पर अब क्या फायदा था बन्टी और कल्लू भईया की कृपा से हम दोनों मोहल्ले के प्रेमीयुगल तो साबित हो ही चुके थे !! 
विनीता का हमसे मिलना जुलना बन्द हो चुका था! कॉलेज जाते समय उसके साथ जासूस के तौर पर मिश्रा जी की बेटी रुचि को लगा दिया गया था!! पर हम भी कम नहीं थे हमने अपने दोस्त नितिन की बहन गरिमा को सारी बात बताई जो विनीता और रुचि के साथ ही पढ़ती थी। हमने उससे कहा कि कॉलेज के बाद किसी तरह से थोड़ी देर के लिए रुचि को विनीता से दूर ले जाया करो जिससे हम कुछ देर उससे बात कर सकें !!
खैर यह मुलाकातों का सिलसिला ज्यादा दिन नहीं चला क्योंकि ग्रेजुएशन करते ही विनीता को उसके भाई विकास के पास लखनऊ भेज दिया गया और वो वहीं से एम.ए. की पढ़ाई करने लगी !! अब उससे कभी कभार ही मुलाक़ात होती थी वो भी सबके सामने मोहल्ले के कॉमन फंक्शन में !! 
ग्रेजुएशन के बाद मैं एक कम्पनी में नौकरी करने दिल्ली चला गया !! 2004 में मैं दिल्ली में ही था जब पता लगा कि विनीता की शादी हो गयी और उसका पति नोएडा में किसी कंपनी में इंजीनियर है!! एक दिन मैं वीकेंड में कानपुर आया हुआ था ! संडे रात की श्रमशक्ति से मुझे वापस जाना था! अचानक माथुर अंकल अपने हाथ में बनारसी के लड्डू का डिब्बा और एक किलो ग़ज़क लिए चले आ रहे थे ! आते ही मम्मी से बोले "भाभी जी कल देखा था मोहित को तो सोचा आज तो दिल्ली जा ही रहा होगा! उससे कहिए यह मिठाई और ग़ज़क विनीता के यहाँ पहुंचा देगा प्लीज !! विनीता का पता और मोबाइल नम्बर मैंने इस पर्ची में लिख दिया है!" उन्होंने पर्ची मेरे हाथ में थमा दी ! नोएडा सेक्टर 62 का पता था !! मैंने टालने के लिए कहा "अंकल मैं रहता हूँ द्वारका में और यह नोएडा सेक्टर 62 मेरे लिए एकदम उल्टा है! मैं अगले संडे से पहले नहीं जा पाउँगा !" पर मम्मी ने मेरी बात काटते हुए कहा "पर तेरा ऑफिस तो ओखला में हैं न ! कल शाम ऑफिस से निकल कर सीधे नोएडा चले जाना और रात तक वापस आ जाना !!" 
मैंने नाराजगी वाली नजरों से मम्मी की तरफ देखा !! पर मम्मी ने डिब्बे मेरे बैग में रख दिये और बोलीं एड्रेस संभाल कर रखना !! माथुर अंकल चले गए !!
मैं रास्ते भर विनीता के बारे में सोचता रहा !! अगले दिन मैंने 5 बजे ही ऑफिस छोड़ दिया! नेहरू प्लेस से नोएडा की बस पकड़ कर मैं हाथ में डिब्बा लिए चल दिया !! ठीक 6:15 पर मैं उसकी सोसाइटी के बाहर था! उसके फ्लैट 409 की घण्टी बजाते समय मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था !! 
दरवाजा खुला और एक खूबसूरत नौजवान सामने था !! "आप मोहित हैं न ?? मैं अभिषेक ! आइए अंदर आइए !!"
मैं उससे हाथ मिलाकर अन्दर गया !! पीछे से हल्के हरे रंग का सूट पहने विनीता आयी और जोर से बोली "कैसे हैं मोहित जी?"
"यह मैं मोहित से मोहित जी कब से हो गया विनीता?"
अरे यार नाराज़ क्यों होते हो बैठो तो पहले ! अभिषेक ने कहा।
मैंने कहा नहीं ऐसी कोई बात नहीं पर विनीता और मैं एक ही उम्र के हैं इसलिए कहा !!
फिर हम दोनों बातचीत करने लग गए वही नार्मल क्रिकेट, पॉलिटिक्स, सेंसेक्स आदि की बातचीत !
कुछ देर बाद चाय आयी और फिर खाना !! खाने की टेबल पर अभिषेक बोला "भाई मोहित मैं तो शाही पनीर बनवाना चाह रहा था पर विनी ने कहा कि तुम्हें पनीर के बजाय दम-आलू ज्यादा पसंद हैं तो हमने कहा यही सही !!" 
बातें करते करते कब 09:30 बज गए पता ही नहीं चला !! मैं चलने को हुआ तो अभिषेक बोले चलो मैं तुम्हें बस स्टैंड तक अपनी गाड़ी से छोड़ देता हूँ!
मैंने विनीता को गुडनाईट कहा और चल दिया ! मेरे बाहर निकलते ही अभिषेक ने विनीता की तरफ देखा और कहा देखा विनी !! मैं शर्त जीत गया !! 
विनीता के चेहरे पर हँसी और संतुष्टि का भाव नज़र आ रहा था !! पर मैं कुछ समझ नहीं पाया तो अभिषेक मेरे कन्धे पर हाथ रखकर बोला "अरे चलो रास्ते में बताता हूँ !" 
गाड़ी बाहर निकाल कर अभिषेक बोला सिगरेट चलेगी दोस्त ? मैंने हाँ में सिर हिलाया तो उसने गाड़ी के डैशबोर्ड से क्लासिक रेगुलर की डिब्बी निकाल कर एक सिगरेट मेरी ओर बढ़ाई और एक खुद ले ली !! लाइटर से सिगरेट जला कर वो बोला "यही सोच रहे हो न कि मेरी और विनी की क्या शर्त थी!!"
"तो सुनो कल रात में जब डैडी का फ़ोन आया कि उन्होंने तुम्हारे हाथ से मिठाई भेजी है तब से मैं विनी के चेहरे पर तनाव देख रहा था! कल रात मैंने कई बार पूछा पर उसने कुछ नहीं बताया !! अचानक आज सुबह उसने अपने आप मुझे तुम्हारी और उसकी प्रतियोगिता दर्पण वाली पूरी कहानी सुना दी !! मुझे बहुत अच्छा लगा कि चलो मेरी पत्नी को मुझ पर पूरा यकीन है और वो मुझसे कुछ छिपायेगी नहीं ! फिर मैंने उससे कहा कि अगर तुम इस बात को न भी बतातीं तो क्या फर्क पड़ता !! तब उसने कहा कि उसे डर था कि कहीं तुम यानी मोहित मेरे सामने कुछ ऐसा न कह दो  जिससे मुझे तुम दोनों पर शक हो जाये !"
तब जानते हो दोस्त मैंने क्या जवाब दिया ?
मैंने कहा माय डिअर विनी तुम हम लड़कों को नहीं जानती हम जिसे वाकई चाहते हैं न उसे कभी तकलीफ में नहीं देख सकते! अगर मोहित ने वाकई तुमसे प्यार किया होगा तो शर्त लगा लो, वो कुछ भी नहीं बोलेगा !! और देखो मोहित मैं शर्त जीत गया !!
उसने एक साँस में सब कुछ कह दिया!!
मैंने उसके कंधे पर हाथ रख कर कहा "दोस्त तुमने शर्त ही नहीं, मेरा दिल भी जीत लिया !! विनीता तुम्हारे साथ बहुत खुश रहेगी !!"
इसके बाद हम दोनों बिना कुछ कहे उसकी गाड़ी में बैठ गये !! रेडियो सिटी 103.4 एफएम पर गाना बज रहा था -
"भंवरे ने खिलाया फूल, फूल को ले गया राजकुंवर"

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©अम्बेश तिवारी

Sunday, July 4, 2021

झाड़े रहो कलेक्टरगंज !!

हटिया खुली बजाजा बन्द,
झाड़े रहो कलेक्टरगंज !!

कानपुर के गौरवमयी इतिहास का एक  अनकहा पन्ना !! कानपुर में रहने वालों लोगों ने अक्सर मज़ाक में यह कहावत सुनी होगी पर बहुत कम लोगों को इस कहावत के पीछे का इतिहास पता होगा !!

इसे जानने से पहले आपको हटिया, बजाजा और कलेक्टरगंज के बारे में समझना होगा !! हटिया यानी कानपुर में लोहे के बर्तनों का थोक बाजार ! पर हटिया उन दिनों क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए भी जाना जाता था !! बजाजा यानी कपडों का थोक बाजार जिसे आप आज जनरलगंज के नाम से जानते हैं और कलेक्टरगंज यानी कानपुर की थोक अनाज मण्डी, जहाँ दूर दूर गाँवों से किसान अपना अनाज बैलगाड़ी में लादकर बेचने के लिए लाते थे !!
तो बात उन दिनों की है जब पूरे देश में गाँधी जी का असहयोग आंदोलन चल रहा था और हर जगह विदेशी कपड़ों की होली जलाई जा रही थी!! कानपुर के कपड़ा बाजार के व्यापारियों ने इसमें बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और विरोध स्वरूप अपनी दुकानों में इंग्लैंड की मिलों में बने कपड़ों का पूर्ण बहिष्कार किया ! जिसकी वजह से उन दुकानों में अनिश्चित कालीन बन्दी की स्थिति आ गयी !! इससे उन व्यापारियों और वहाँ काम करने वाले कर्मचारियों के घरों में भूखे रहने की नौबत तक आ गयी !! 
इस वजह से उन दिनों में उनके घरों की महिलाएं रात के अंधेरे में कलेक्टरगंज जाती थी और वहाँ झाड़ू लगाती थीं क्योंकि दिन में अनाज की खरीद-फरोख्त के दौरान गल्ले के व्यापारी किसानों की बोरियों में रखे अनाज की गुणवत्ता जाँचने के लिए एक नुकीले खुरपीनुमा यन्त्र जिसे आम भाषा में परखी कहा जाता है को बोरी में घुसाकर थोड़ा अनाज निकालते थे और बाद में वही अनाज काफी मात्रा में बाज़ार की जमीन पर गिर जाता था !
तो कपड़ा बाज़ार के कुलीन परिवारों की स्त्रियाँ रात के अंधेरे में इस अनाज को बटोर लेती थीं और उसी से अपने बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी चावल का प्रबंध करतीं थीं !!
दिन के समय वही व्यापारी और कर्मचारी खादी के कपड़े पहन कर अंग्रेज़ो के विरोध में मोर्चा निकलते थे !! यह बात जब अंग्रेजों को पता लगी तब उन्होंने इन व्यापारियों को हतोत्साहित करने के लिए अपने चाटुकारों द्वारा इस कहावत का जन्म करवाया और जब सत्याग्रही व्यापारी बाज़ार में निकलते थे तो अंग्रेजों के चाटुकार उन्हें चिढ़ाने के लिए कहते थे कि 
"हटिया खुली बजाजा बन्द,
झाड़े रहो कलेक्टरगंज !!"
फिर तो यह प्रचलन चल गया कि यदि कोई निम्नवर्गीय या निम्नमध्यवर्गीय व्यक्ति थोड़े अच्छे कपड़े पहन कर निकलता है तो आसपास के लोग तंज के रूप में उसे चिढ़ाने के लिए "झाड़े रहो कलेक्टरगंज" इस कहावत का प्रयोग करते हैं !!! 
पर इस कहावत के पीछे हमारे पूर्वजों का कितना बड़ा त्याग छिपा है यह बात लोग नहीं जानते !!
इसलिए जब भी इस कहावत का प्रयोग करें तो अपने इस गौरवशाली इतिहास और उन अज्ञेय बलिदानियों को जरूर याद करें !!

Interview Part-1

संस्मरण :: इंटरव्यू  भाग-1

साल 2001 की बात है ! मुझे एटा जिले में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की नौकरी करते हुए कुछ महीने बीत चुके थे ! ठीक ठाक नौकरी थी !! 2500 रू महीना वेतन मिलता और 50 रू रोज़ का एलाउन्स!! मज़े में बीत रही थी !! एक पुराना सेकंडहैंड  स्कूटर था जिस पर रोज़ सुबह मैं एक बड़ा सा बैग (दवाओं के सैंपल से भरा हुआ) पीठ पर लादकर दिन भर एक डॉक्टर से दूसरे डॉक्टर के यहाँ जाया करता था !!
एटा में ठण्डी सड़क स्थित काली मंदिर के पीछे मैंने एक छोटा सा कमरा किराए पर ले रखा था !! वहीं पर देर शाम जब थक कर लौटता तो मई जून की भयंकर गर्मी में भी केवल एक टेबल फैन को सर के पास लगाकर सो जाता था ! उन दिनों उत्तर प्रदेश की विद्युत व्यवस्था बहुत बुरी थी तो कई बार पूरी रात बिना बिजली के काटनी पड़ती थी और सुबह उठकर फिर वही दौड़-भाग वाली दिनचर्या!! खाने का यह हाल था कि कई बार सुबह चाय के साथ दो समोसे खा लिए तो फिर पूरा दिन कुछ खाया ही नहीं, सीधे रात को खाना !! एक दिन गर्मियों में ऐसे ही दो समोसे खाकर मैं काम पर चला गया ! एटा से 30 किमी दूर एक कस्बा है सकीट, वहाँ काम कर रहा था!! भयंकर गर्मी और लू की वजह से मैंने एक डॉक्टर के क्लिनिक के बाहर ही पहले उल्टी की और फिर चक्कर खाकर गिर पड़ा !! डॉक्टर ने तुरन्त मुझे अन्दर लिटाकर पानी पिलाया फिर इंजेक्शन लगाया, तब कुछ देर के बाद तबियत ठीक हुई !! उस दिन के बाद से मैं उस डॉक्टर की सलाह पर एक बोतल पानी और Parle-G बिस्किट अपने साथ रखता और हर आधे घण्टे पर एक ग्लास पानी और 2-4 बिस्किट खा लेता था तो कभी Dehydration की वजह से बीमार नहीं पड़ता था !!
यह मेरे जीवन संघर्ष का शुरुआती दौर था और हम निम्नमध्यमवर्गीय लोगों के लिए यह तकलीफें ज्यादा मायने नहीं रखती थीं इसलिए मैं तब भी खुश रहता था !!

तो किस्सा कुछ यूँ है कि एक दिन जब एटा के जिला अस्पताल में मैं डॉ.अरुण उपाध्याय की कॉल कर रहा था तो वहीं पर बैठे एक शख्स की नजरें मुझे बहुत ध्यान से देख रहीं थीं !! जैसे ही मैं बाहर आया उसने मुझे अपने पास बुलाया और अपना कार्ड देकर मुझसे कहा " Hi, I am Rajat Vishnoi, Area Sales Manager in Blue Cross Limited." "मुझे अपनी कम्पनी के लिए एटा में M.R. चाहिए ! तुम काम करोगे ?" मैंने बिना किसी संकोच के छूटते ही पूछा "पैसे कितने मिलेंगे?" उसने कहाँ पाँच हज़ार सैलरी, 100 रू लोकल DA, 120 रू एक्स स्टेशन, और 225 रू आउटस्टेशन !! यह मेरी वर्तमान आय से दुगुनी रकम थी! मैं एकदम चहक उठा ! मैंने पूछा क्या करना होगा ? वो बोला तीन राउंड का इंटरव्यू होगा तब ऑफर लेटर मिलेगा! फिर एक final H.R. Round के बाद मुम्बई में 21 दिन की ट्रेनिंग होगी ! वो ट्रेनिंग पूरी करने के बाद ही अपॉइंटमेंट लेटर मिलेगा !! 
मैंने कहा ठीक है तो इंटरव्यू के लिए कहाँ जाना होगा !! उसने कहा पहला इंटरव्यू मैं आगरा में लूँगा, दूसरा हमारे R.S.M. सर लखनऊ में लेंगे फिर तीसरे इंटरव्यू के लिए मुम्बई हेड ऑफिस जाना होगा !! मुम्बई जाने के नाम पर मेरे चेहरे पर आई चिन्ता की लकीरें देखकर उसने हँसकर कहा चिन्ता मत करो इंटरव्यू के परिणाम कुछ भी हो पर तुम्हें आगरा, लखनऊ और मुम्बई आने जाने और रुकने का पूरा खर्चा कम्पनी देगी !! 
मैंने खुशी खुशी हामी भर दी !! उसने दूसरे दिन आगरा पहुँचने के लिए कहा !! 
उस रोज़ रात भर नींद नहीं आयी! एक तो पहली बार मुम्बई जाने की खुशी थी दूसरा अगर यह नौकरी फाइनल हो गयी तो इतने पैसों को कैसे खर्च करूँगा इसका उत्साह भी था !! 
खैर किसी तरह रात कटी और अगले दिन सुबह अपने सरोज मार्किट वाले स्टॉकिस्ट जैन साहब (न्यू जनता केमिस्ट) से मिलकर मैं एटा से आगरा की ओर निकल पड़ा!

एटा से आगरा लगभग 90 किमी दूर था ! इसके बीच में टूण्डला से पहले एक छोटा सा कस्बा अवागढ़ पड़ता है जहाँ मैं काम करने जाया करता था तो उस रोज काम का नुकसान न हो इसलिए मैंने अवागढ़ में काम करना मुनासिब समझा !! सुबह ग्यारह बजे तक मैं अवागढ़ पहुँच गया और तीन घण्टे में वहाँ के आठ दस डॉक्टरों से   मिलकर मैं आगरा के लिए निकल पड़ा। आगरा पहुँचते पहुँचते लगभग 4 बज गया था! जोरों की भूख लगी थी पर मैंने पहले PCO से विश्नोई जी को फ़ोन किया ! उन्होंने शाम 06:00 बजे मुझे दयालबाग के पास अमर विहार पुलिस चौकी के पीछे अपने घर पर बुलाया !! अब मेरे पास खाना खाने के लिए पर्याप्त समय था !! तो वहीं बिजलीघर बस अड्डे पर एक ढाबे में मैंने खाना खाया और थोड़ी देर वहीं रुका रहा !! फिर वहाँ से ऑटो से दयालबाग पहुँचा !! थोड़ी सी मेहनत करके मैंने विश्नोई जी का घर ढूँढ़ लिया !!
पर वो अभी तक नहीं आये थे !! उनकी पत्नी ने इंतज़ार करने को कहा !! खैर लगभग साढ़े छह बजे वो आये !! 
आते ही उन्होंने मुझे एक टेस्ट पेपर दे दिया और 30 मिनट में उसे पूरा करने के लिए कहा !! 
उसमें कुछ सामान्य ज्ञान के प्रश्न और कुछ फार्मा और दवाओं से जुड़े प्रश्न थे !! कुछ और भी कॉमन सवाल जैसे "आप क्यों खुद को इस जॉब के काबिल समझते हैं ?" या "आप खुद को पाँच साल बाद कहाँ पाएँगे?" आदि आदि
मैंने 20 मिनट में ही पेपर कर लिया और उन्हें दे दिया ! तब तक वो हाथ मुँह धोकर कपड़े बदलकर आ चुके थे !! अब उन्होंने इण्टरव्यू शुरू किया !! उन्होंने सिर्फ मेरी वर्तमान कंपनी के products और मार्केटिंग के तरीके में रुचि दिखाई !! उनके ज्यादातर प्रश्न यह थे कि मैं कौन कौन से एरिया कवर करता हूँ, उन markets कितना potential है आदि आदि !! शायद वो मेरे मूल्यांकन से ज्यादा अपनी future planning कर रहे थे !! खैर उन्होंने मुझे दूसरे दिन सुबह 11 से 12 के बीच लखनऊ में हज़रतगंज स्थित आफिस में Mr. Gagan Bhandari(R.S.M.) से मिलने को कहा !! और यह भी कहा कि अगर लखनऊ में सब ठीक रहा तो तुरंत ही मुंबई जाना होगा इसलिए वैसी तैयारी कर के निकलना! मैंने वहाँ से निकल कर तुरन्त एटा के लिए बस पकड़ ली और रात के 11बजे मैं वापस अपने कमरे में पहुँचा !! फटाफट एक बैग में कपड़े रखे और तुरंत एटा के बस अड्डे पर आया !! वहाँ से रात बारह बजे कानपुर की बस पकड़ी और सुबह 7 बजे घर पहुँचा !! घर पहुँच कर मम्मी पापा को पूरी बात बताई ! फिर नहा धोकर नाश्ता किया और तुरन्त बस से लखनऊ के लिए निकल पड़ा !! 
अगर आपने कभी भी यूपी रोडवेज से सफर किया है तो आप जानते होंगे कि आप लाख कोशिश कर लें पर आप रोडवेज की बस के सफर में सो नहीं सकते !! तो मैं सारी रात का जगा हुआ था !! इसलिए आँखे झुक रही थीं पर बैठा तो अभी भी रोडवेज की बस में ही था तो नींद तो आने से रही ! खैर लगभग 11:30 बजे मैं हज़रतगंज स्थित उस कम्पनी के दफ्तर पहुँच चुका था !! भण्डारी साहब अभी नहीं आये थे !! मैं इंतज़ार करने लगा! उस दफ्तर के AC की ठण्डक की वजह से या अपनी थकान की वजह से, मैं वहीं सोफे पर बैठे बैठे सो गया !! थोड़ी देर बाद किसी महिला की आवाज़ ने मुझे जगाया ! Mr.Tiwari !! Mr.Tiwari !! वो जोर से चिल्लाई !

मैं हड़बड़ा कर उठा ! "ओह शायद मैं सो गया था" मैंने शरमाकर कहा ! तो वो बोली "शायद नहीं आप वाकई में सो रहे थे !!" जाइये भण्डारी साहब आपका इंतजार कर रहे हैं !! मैंने पहले वाशरूम जाकर मुँह धोया बाल ठीक किये फिर भण्डारी साहब के केबिन के भीतर पहुंचा ! 

May I come in Sir ? 
Yes !!
Good Morning Sir !! 
It's Good afternoon Young man !!
Sorry Sir ! Good afternoon !!
Please be seated !!
Thank you Sir !!
इसके बाद उनके सवालों का सिलसिला शुरू हुआ।

Q-1 : Mr.Tiwari ! You've just started your career 4 months back and now you wanted to switch ! May I know the exact reason of seeking the change ?

Ans: Pardon Sir ! Firstly I was not looking for any change. I am pretty happy with my current company. The only reason for this interview is the lucrative package offered by Mr.Vishnoi !! Everybody wants to earn more and more money !! So am I !! What's wrong in that ?

Q-2 : It means, If we hire you and after few months some other company offers you a higher package you'll switch to that company. So why should we hire such a non-loyal person?

Ans: Sir, that depends on that particular future circumstances ! No possibility can be denied ! Same is the case, if I wouldn't be able to meet your expectations, even with a justified reason, you'll fire me without giving me second chance. So in my opinion loyalty should be mutual not one-sided !! If its not there, then either side should not complain for loyalty !!

मुझे नहीं पता मेरा यह जवाब उन्हें पसंद आया या नहीं पर उन्होंने बात बदल दी !!

Q-3: What are NSAIDS ? and why over usage NSAIDS are harmful to body ?

Ans: Sir, NSAIDS are Non-Steroidal antiinflammatory drugs mainly used for the treatment of pyrexia, pain and swelling. Over usage of these drugs have adverse effect causing Gastro and UTI disorders.

Q-4: OK ! Tell me couple of your strengths and weaknesses !

Ans: Sir I am a quick learner with sharp memory and I have excellent communication skills. That's my strength !! 

And weaknesses ? उन्होंने पूछा !!

Sir, once you hire me and you'll come to know all my weaknesses !! Why should I tell you today !!
मैंने हँसकर जवाब दिया !!

Q-5: In your resume it's written that you have interest in astrology and horoscope. Have you studied astrology?

Reply : not much but I can read a horoscope and give prediction.

Q-6 : OK, then tell me according to your horoscope, will you be able to clear this interview or not ?

अब यह सवाल मुझे फंसाने वाला था क्योंकि अगर मैं हाँ कहता हूँ तो यह overconfidence होता क्योंकि वो कह सकते  है कि जाओ मैं नहीं रखता तुम्हें और न कहने का मतलब था अपनी ही प्रतिभा को सन्देह के घेरे में लाना !!
मैं तीस सेकंड के लिए चुप हुआ ! इससे उनके चेहरे की मुस्कान और चौड़ी हो गयी जैसे मन ही मन कह  रहे हों "क्यों बेटा ! अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे"
खैर मैंने सोचकर जवाब दिया कि -

Sir, Astrology is an indicative science but its not 100% Accurate. Right now there are favourable indications of stars are with me, but end of the day what actually matters is my "Karma" means performance. 

You are very "witty" and "loquacious" person !! Wait outside!! भण्डारी साहब बोले !!

मुझे loquacious और witty दोनों का मतलब नहीं पता था, पर मुझे लगा यह पक्का मुझे भगा देगा !! मैं बाहर आकर खुद को कोसने लगा ! मन ही मन खुद से कहने लगा "तुमको क्या जरूरत थी इतना oversmart बनने की!" 
मैं सोचने लगा पता नहीं यह आने जाने का किराया भी देगा कि नहीं !! कल से तीन सौ रुपये खर्च हो चुके थे !! मुझे खुद पर गुस्सा आ रहा था !!
करीब 15 मिनट बाद वही लड़की मेरे पास एक Travelling expense का फॉर्म लेकर आई और बोली "आपका अभी तक जो भी पैसा खर्च हुआ वो टिकट के साथ इस फॉर्म में detail में लिख कर जमा कर दीजिए! यहाँ से वापस एटा जाने का खर्च भी जोड़ लीजिएगा !!" खाने पीने का कोई पैसा नहीं मिलेगा !!"
अब तो मुझे पूरा यकीन हो गया कि मैं fail हो चुका हूँ !!
मैंने फटाफट हिसाब बना कर उस लड़की को दे दिया !! लगभग 330/- का हिसाब था !! उसने मुझसे वाउचर पर सिग्नेचर करवाया और 330/- रू दे दिए !! मैं पैसे लेकर जाने लगा तो उसने फिर रुकने के लिए कहा!! अब मेरे दिल की धड़कने तेज़ हो गईं थीं !! दस मिनट बाद फिर वो आयी और बोली जाइये भण्डारी साहब आपको बुला रहे हैं !!
मैं भण्डारी साहब के केबिन में पहुँचा !
उनका चेहरा एकदम से गंभीर हो गया ! मेरी तरफ देखकर वो लगभग गुस्से भरा चेहरा बनाते हुए बोले "What do you think about your performance?" Whether I should select you or not ?

इस बार मैं कुछ नहीं बोला ! केवल मुस्करा दिया !!
वो अपने आप ही बोले !
Congratulations !! Mr.Tiwari you have cleared the second round of interview ! You have to appear for the final round of interview in Mumbai head office on Saturday 10 AM sharp !! Go and meet Yashika! She'll brief you with all other details. Best of luck !!

इसके बाद पहली मुम्बई यात्रा और एक बड़ी कॉरपोरेट कंपनी में इंटरव्यू देने के अनुभव का वर्णन अगले भाग में !!

Tuesday, July 30, 2019

इंसाफ की मौत

हम सब की ज़िंदगी में कभी न कभी एक ट्रक आयेगा,
जो इन्साफ की उम्मीदों  को कुचल कर चला जायेगा !!
आप उस ट्रक पर बैठ कर चाँद पर जा सकते हैं,
या जंगलों में चीते के साथ फोटो भी खिंचवा सकते है !!
पर अगर आप नीचे जमीन पर चल रहे हैं
और आपके मन में भी कुछ बदलाव के ख्वाब पल रहे हैं ?
तो उन ख्वाबों से बाहर आइये,
चारों ओर नज़र दौड़ाइये
और फिर कोशिश करिये उस तेज
रफ्तार दौड़ते ट्रक से बचने की !!

अम्बेश तिवारी
30-07-2019

Saturday, January 19, 2019

वो हँसी कहाँ से आती है?

वो हँसी कहाँ से आती है?

पोर-पोर हँसता चेहरा
निर्बाध बहता
अविरल झरना खुशी का
भरसक फैले होंठ
खिली बत्तीसी
आँखों से झरती, गिरती, ढुलती
उन चेहरों की
वो हँसी कहाँ से आती है?

कड़ी धूप, उमसती गर्मी
सिर पर थैला, उमगते कदमों से
गली, मोहल्ला, हाट बाजार
लाल जलेबी, भजिए खाते
सज-सँवरकर
धूप को धूल चटाते
अल्ह़ड़ उन चेहरों की
वो हँसी कहाँ से आती है?

कहीं बेफिक्र, गर्वीली
निश्छल, लजाती कहीं
कभी वजह से
बेवजह ही कभी
खिलती, खनखनाती, फूटती,फैलती
उन चमचमाते गहनों सजे चेहरों की
वो हँसी कहाँ से आती है?

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अम्बेश तिवारी
19.01.2019

होली पर व्यंग्य कविता

 होली पर व्यंग्य कविता  अबकी होली पर दिल्ली ने बदला ऐसा रंग, छोड़ आप का साथ हो गयी मोदी जी के संग, मोदी जी के संग करो मत महंगाई की बात, अपने ...