Saturday, November 9, 2013

कॉर्पोरेट जगत की विसंगतियां

मित्रों यह कहानी आज कल के कॉर्पोरेट जगत की विसंगतियों पर लिखा गया एक व्यंग है जिसे धार्मिक प्रतीकों के माध्यम चित्रित किया गया है | मेरा उद्देश्य किसी समुदाय विशेष की धार्मिक भावनाओं को ठेस पंहुचाना कतई नहीं है|
यदि इस कहानी से किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है तो मैं उसके लिए क्षमा चाहता हूँ| मैं इस कहानी का लेखक नहीं हूँ बल्कि यह कहानी एक आईआईएम के प्राध्यापक द्वारा लिखी गयी थी और कई वर्ष पूर्व मुझे मेरे एक मित्र ने मेल से भेजी थी जो मूल रूप से अंग्रेजी में थी मैंने केवल उसका हिंदी अनुवाद किया है............

लंका का युद्ध समाप्त करने के बाद हनुमान जी अपनी छुट्टियाँ बिताने चित्रकूट चले गए और वहां आराम से राम जी द्वारा निर्मित विशेष झरने (जिसे हम हनुमान धारा के नाम से जानते हैं) में स्नान का आनंद ले रहे थे कि तभी अयोध्या के फाइनेंस और एकाउंट्स डिपार्टमेंट से उनके लैपटॉप पर एक मेल आया कि उन्हें अपने advance dues क्लियर करने हैं जो एडवांस उन्होंने लंका से हिमालय पर जाने और संजीवनी बूटी लाने के लिए लिया था| हनुमान जी पहले मेल पर कोई ध्यान नहीं दिया पर 3-4 रिमाइंडर मेल्स और CUG  मोबाइल पर लगातार कॉल आने के बाद मजबूरन हनुमान जी अपनी छुट्टियाँ कैंसिल करके अयोध्या लौट आये|

उन्होंने अपने TA, DA, बिल, सुषेन वैद्य का बिल , रास्ते में कालनेमि से लड़ने के खर्चे, संजीवनी बूटी की कीमत, लौटते समय भरत जी के तीर से घायल होने पर फर्स्ट ऐड के खर्चे, Transportation Charges और Misc Expenses आदि आदि तुरंत सबमिट कर दिया|

1.       आपकी Tour Sanction Report कहाँ है ?  HR Dept ने पुछा | हनुमान जी ने किसी तरह 2–3 बार मिन्नतें करके वो रिपोर्ट सम्बंधित अधिकारियों से प्राप्त कर ली|

2.       हनुमान जी ने Air Travel का T.A. bill क्लेम किया था पर उन्हें केवल सेकंड क्लास स्लीपर का किराया दिया गया और अन्य खर्चों जैसे सुषेन वैद्य का बिल , रास्ते में कालनेमि से लड़ने के खर्चे, संजीवनी बूटी की कीमत, लौटते समय भरत जी के तीर से घायल होने पर फर्स्ट ऐड के खर्चे, के बिल का पेमेंट नहीं किया गया क्योंकि उन खर्चों के लिए कोई सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट नहीं था |

जब उन्होंने इसका कारण पुछा तो उन्हें बताया गया कि

a)       अपने पद के हिसाब से आप सिर्फ सेकंड क्लास स्लीपर के ही entitled हैं|
b)       आप उन चीज़ों के लिए क्लेम नहीं कर सकते हैं जिनका प्रॉपर बिल आपके नहीं है|

तब हनुमान जी श्री राम से जाकर मिले और उन्हें अपने यात्रा खर्चे पर की गयी कटौती की जानकारी दी| श्री राम को यह सुनकर बहुत गुस्सा आया और उन्होंने तुरंत HR Manager और Accounts Manager को बुलाया और कहा कि हनुमान जी को तुरंत उनका Air travel और अन्य खर्चों का पेमेंट किया जाये तब HR Manager ने उनको HR Manual और Marketing Manual दिखाते हुए कहा कि यह नियम महाराज दशरथ जी के पिता जी द्वारा बनाए गए थे अब यदि आप मर्यादा पुरुषोत्तम होते हुए अपने पूर्वजों द्वारा बनाये गए नियमों का उल्लंघन करना चाहते हैं तो मुझे कोई समस्या नहीं है|
श्री राम कुछ न बोल सके| उन्होंने ने हनुमान जी के लिए दूसरा उपाय सोचा और उनसे कहा कि तुम अपना बाकी का अमाउंट मुझसे कैश ले लो | पर हनुमान जी श्री राम से कैश कैसे ले सकते थे ?

उन्होंने प्रभु को उत्तर दिया हे प्रभु मैं लक्ष्मण जी सेवा के लिए आपसे कैश कैसे ले सकता हूँ ? लक्ष्मण जी मेरे लिए उतने ही आदरणीय हैं जितने आप|

हनुमान जी मन ही मन सोचने लगे क्यों उन्होंने एकाउंट्स डिपार्टमेंट की बातें सुनकर अपनी छुट्टियाँ कैंसिल करी, सारी औपचारिकताएं पूरी करी, और उनके कारण श्री राम को एक ऐसी असमंजसपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ा|
हनुमान जी इस घटना के बाद भी श्री राम और अयोध्या के साथ उसी निष्ठा से काम करते रहे जैसे वो इस घटना के पहले कर रहे थे|

मित्रों हनुमान जी तो भगवान थे पर हम जैसे तुच्छ मानवों को इस घटना से एक सबक लेना चाहिए और वो यह कि

बिना समुचित पूर्वस्वीकृति के कोई भी काम न करें, चाहे काम कितना भी अतिआव्यश्यक और महत्वपूर्ण क्यों न हो

ज्यादा से ज्यादा क्या होगा, यह औपचारिकताएं पूरी करने में हो सकता है लक्ष्मण जी न बचे! बस इससे ज्यादा कुछ नहीं होगा|  
 



Post a Comment