Tuesday, June 7, 2016

मेरे गिले और तुम्हारे शिकवे !

मेरे गिले और तुम्हारे शिकवे, वही पुराने सदा रहेंगे,
मगर तुम्हारी मोहब्बतों के बस हम दीवाने सदा रहेंगे !

वो चिट्ठियों में गुलाब देना, वो हरकतों से जवाब देना,
वो तेरी नज़रों के तीर, उनके वही निशाने सदा रहेंगे !
मेरे गिले और तुम्हारे शिकवे, वही पुराने सदा रहेंगे

वो तेरा सबसे नज़र चुराकर, वो बातें करना यूँ छत पे आकर !
वो शेर, नगमे, ग़ज़ल औ किस्से, वही फ़साने सदा रहेंगे !
मेरे गिले और तुम्हारे शिकवे, वही पुराने सदा रहेंगे

ज़माने भर की ख़ुशी तुम्हें हम, जो दे न पाए तो गम न करना,
मगर मोहब्बत की यह कशिश और यही ज़माने सदा रहेंगे !
मेरे गिले और तुम्हारे शिकवे, वही पुराने सदा रहेंगे

मैं रूठ जाऊं तो तुम मनाना, तुम्हे मना लेगा यह दीवाना,
यूँ हँसते गाते कटेगा जीवन यही तराने सदा रहेंगे !
मेरे गिले और तुम्हारे शिकवे, वही पुराने सदा रहेंगे |

जब आएगा उम्र का वो लम्हा, के ज़िन्दगी की हों ख़त्म घड़ियाँ,
नए जनम में मिलेंगे फिर से, यही ठिकाने सदा रहेंगे !
मेरे गिले और तुम्हारे शिकवे, वही पुराने सदा रहेंगे

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अम्बेश तिवारी
07.06.2016

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