Monday, June 27, 2016

आओ हँस कर बात करें !

आओ हँस कर बात करें !
यह छोटा सा जीवन इसको
क्यों रो कर बर्बाद करें,
आओ हँस कर बात करें !

1.
माना मुश्किल बहुत सफ़र है,
अंधियारी सी एक डगर है,
घना कुहासा बिखरा बिखरा,
धुंधलाती हर एक नज़र है,
पर रोते रहने से क्या यह,
गम छोटा हो जाएगा !
पीड़ा का गुणगान सुनाने से
क्या दुःख मिट जाएगा !
सुख दुःख एक अवस्था मन की,
यह तो आना जाना है,
जीवन यूँ ही चलता रहता,
कुछ खोना कुछ पाना है,
क्यूँ हम शोक मनाये इसका,
क्यों कोई अवसाद करें !
आओ हँस कर बात करें !

2.
हर मज़हब ने, हर भाषा में,
बस इतना सिखलाया है !
यह जीवन दो चार दिनों का,
क्षण-भंगुर यह काया है !
काहे का अभिमान करे हम,
औरों से क्यों द्वेष करें,
धन-दौलत, बंगले और गाड़ी,
चार दिनों की माया है !
एक दूजे का सुख-दुःख बांटें,
और अच्छा व्यवहार करें,
कष्ट किसी को कभी न देवें,
कष्टों का उपचार करें !
जो अपने हों दूर कहीं तो,
उनको दिल से याद करें !
आओ हँस कर बात करें !

3.
जात-पात से ऊपर उठकर,
मज़हब की दीवारें तोड़ो ।
भेदभाव को दूर हटा कर,
नफरत वाली बातें छोड़ो ।
क्या रखा है मन्दिर मस्जिद,
हिन्दू और मुसलमाँ में,
हाथ मिलाओ, गले लगाओ,
दिल से दिल का नाता जोड़ो ।
और सियासी चालों में तुम,
गलती से मत फंस जाना !
इनका मकसद हमें लड़ाना
इन बातों में मत आना !
भूल के सारे शिकवे हम सब,
अपना वतन आबाद करें !
आओ हँस कर बात करें !

::::
अम्बेश तिवारी
27.06.2016

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